गुज़रते एहसास

A father's bond with his son.

थामे हुए हाथथा चलना सिखाया,लम्बी रातों को सीने से लगाया। डग-मग से चलतेकदमों को सहलाया,कंधों पे जो अपनेथा अक्सर बिठाया। दूर कभी पासआँखों में बसाया,नन्ही सी इन उँगलियों सेहर साल केक भी कटवाया। जीवन के उतार-चढ़ावऔर बचकाने मेरे सवाल,कभी हँस कर तो कभीगीतों में समझाया। पत्थर दिल सा बनकरज़माने से लड़ना,अपनी बातों की गहराईऔर फिर […]

Read More
Advertisements