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गुज़रते एहसास

गुज़रते एहसास

थामे हुए हाथथा चलना सिखाया,लम्बी रातों को सीने से लगाया। डग-मग से चलतेकदमों को सहलाया,कंधों पे जो अपनेथा अक्सर बिठाया। दूर कभी पासआँखों में बसाया,नन्ही सी इन उँगलियों सेहर साल केक भी कटवाया। जीवन के उतार-चढ़ावऔर बचकाने मेरे सवाल,कभी हँस कर तो कभीगीतों में समझाया। पत्थर...