ज़िन्दगी के हर दौर में
कुछ पाया और कुछ खोया भी
समय के हर रंग रूप को
आज़माया और टटोला भी
लुक्का छुप्पी भी बहुत खेली
दिल लगाया और तोड़ा भी
ज़रूरत को हर तरीके से
निभाया और निचोड़ा भी
कुछ तव्वज़ू दौलत को
और कुछ हुनर को भी दिया
काफिले की धूल से
हर मौज़ का सदका किया
दौलत की बीमारी जिनको
दवा उनका जिस्म भी पाए
हमको तो दवा भी वही चाहिए
जो पायल की आवाज़ में आए।

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