You cannot copy content of this page

ज़िन्दगी के हर दौर में
कुछ पाया और कुछ खोया भी
समय के हर रंग रूप को
आज़माया और टटोला भी
लुक्का छुप्पी भी बहुत खेली
दिल लगाया और तोड़ा भी
ज़रूरत को हर तरीके से
निभाया और निचोड़ा भी
कुछ तव्वज़ू दौलत को
और कुछ हुनर को भी दिया
काफिले की धूल से
हर मौज़ का सदका किया
दौलत की बीमारी जिनको
दवा उनका जिस्म भी पाए
हमको तो दवा भी वही चाहिए
जो पायल की आवाज़ में आए।

%d bloggers like this: