ज़िन्दगी तेरी तलाश है

zindagi teri talash hai

सुकून ढूँढने चला जो
तो रास्ते नें भी मुँह फेर लिया,
रास्ता जो लगता था हमसफ़र
थोड़ा और लम्बा हो चला।

अंजाने थे हम
बेखबर इस मातम से,
जो बैठे दो पल कहीं
मिट्टी भी वहीं गीली थीं।

बादलों के साये में
सोया ज़रूर हूँ,
पर प्यास तो मैंने
आँसुओं से ही है बुझाई।

खोया जो अकसर
वह मेरा नहीं था,
जिसको पाकर खोया
कीमत उसकी लग ना पाई।

बहुत दिया है उसने
और कुछ मैं ढूँढ ही लेता हूँ,
हँसने के बहाने ही अच्छे
जो मुफ्त ही मिल जाते हैं।

ख्व़ाब देखे
अरसा हो चला है अब,
भूल सा गया हूँ
बेसुध कैसे सोते हैं।

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I am a nomad at heart who craves for journeys and experiences. Life is too short to stop exploring and the quest to be happy should go on.

13 thoughts on “ज़िन्दगी तेरी तलाश है

  1. So deep! A dive into the well of emotions! The lines ‘बादलों के साये में…आँसुओं से ही है बुझाई’ hit hard!

    1. I have so many creative people around that there is no dearth of inspiration and ideas. Your work is far better than mine so it deserves the mention and praise 🙂 .

I would love to hear from you :)

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